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दिल्ली के आईएसबीटी कश्मीरी गेट में पुलिस पर गंभीर आरोप, गरीब ड्राइवर के साथ बदसलूकी का मामला

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के आईएसबीटी पार्किंग क्षेत्र में गुरुवार शाम एक कथित पुलिस दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, एक निजी कंपनी की गाड़ी पार्किंग में प्रवेश कर रही थी, तभी वहां सिविल ड्रेस में खड़े एक व्यक्ति के साथ ड्राइवर की कहासुनी हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वह व्यक्ति ऑटो चालकों के बीच खड़ा था और खुद को पुलिसकर्मी बता रहा था।
ड्राइवर ने उससे पहचान पत्र दिखाने की मांग की, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इस दौरान उस व्यक्ति ने अपशब्दों का इस्तेमाल किया। बहस बढ़ने पर मौके पर मौजूद अन्य लोग भी इकट्ठा हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद ड्राइवर को पकड़कर स्थानीय पुलिस चौकी ले जाया गया।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि थाने में ड्राइवर के साथ मारपीट की गई और बाद में उसे छोड़ने के बदले 40 हजार रुपये लिए गए। ड्राइवर एक साधारण परिवार से संबंध रखता है और रोज़मर्रा की मेहनत से अपना घर चलाता है। इस घटना के बाद उसके परिवार और साथियों में आक्रोश है।
अब तक इस मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों या सिविल ड्रेस में मौजूद व्यक्ति के खिलाफ किसी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं आम नागरिकों में भय और अविश्वास पैदा करती हैं।
पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी आम नागरिक के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल इस मामले पर संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह घटना कानून व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

परिवहन विभाग का अल्टीमेटम, 3 दिन में स्लीपर बसों की AIS जांच कराना होगा, नहीं तो ब्लैकलिस्

ग्लोबल न्यूज़ इंडिया.कुलविंदर सिंह

इंदौर, 17 जनवरी 2026: मध्यप्रदेश के परिवहन विभाग ने राज्य में चलने वाली स्लीपर बसों को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। विभाग ने सभी बस ऑपरेटर्स को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया है कि आने वाले तीन दिनों के अंदर सभी स्लीपर बसों की AIS (ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड) जांच पूरी कराई जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित वाहन और ऑपरेटर को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और बस संचालन पर रोक लग सकती है।
इस कार्रवाई का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा और स्लीपर बसों के तकनीकी मानकों को सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में राज्य में कई स्लीपर बस हादसे सामने आए, जिनमें जान-माल का नुकसान हुआ। इसके बाद से ही विभाग और सरकार ने बसों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि AIS टेस्टिंग जरूरी इसलिए है ताकि:
बस की बॉडी और स्ट्रक्चर सुरक्षित रहे
आपातकालीन स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा सके
आग से सुरक्षा और इलेक्ट्रिकल सिस्टम सही पाया जाए
सीट, बर्थ, खिड़की और इंटीरियर मानकों पर हो
जानकारी के मुताबिक, बुधवार देर रात से ही विशेष चेकिंग अभियान की शुरुआत कर दी गई। विभाग ने कई स्लीपर बसों को रोका और उनकी जांच की। जो बसें दस्तावेज़ और फिटनेस में कमियां लिए थी, उन पर मौके पर चालान भी किया गया। अधिकारियों ने साफ कहा कि यह अभियान आने वाले दिनों में और सख्त होगा।
खबर है कि पिछले महीने ही लगभग 90% स्लीपर बसों में आग सुरक्षा और इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ियां पाई गई थीं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही विभाग ने दूसरा चरण शुरू किया है, जिसमें अब रजिस्ट्रेशन और संचालन से संबंधित कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं।
परिवहन विभाग ने बस ऑपरेटर्स को बैठक के लिए भी बुलाया है, ताकि नियमों को स्पष्ट किया जा सके। अधिकारी चाहते हैं कि ऑपरेटर्स खुद आगे आकर सुरक्षा मानकों का पालन करें, क्योंकि स्लीपर बस उद्योग से लाखों यात्रियों की सुरक्षा जुड़ी है। यदि सभी वाहन AIS मान्यता पा लेते हैं, तो यात्रियों का भरोसा भी बढ़ेगा और उद्योग सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ सकेगा।
बस ऑपरेटर्स की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। कई ऑपरेटरों ने कहा कि वे विभाग के निर्देश का सम्मान करते हैं और जल्द से जल्द जांच प्रक्रिया पूरी कराएंगे, हालांकि कुछ ऑपरेटरों ने समयसीमा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि AIS टेस्टिंग में लाइन और औपचारिकताएँ होती हैं, इसलिए 3 दिन की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए।
फिलहाल विभाग इस मामले में सख्त है और समय बढ़ाने का संकेत नहीं दिया है। आने वाले दिनों में यह देखने वाली बात होगी कि कितनी बसें मानकों पर खरी उतरती हैं और कितनी पर विभाग कार्रवाई करता है।

धीर लॉजिस्ट की नई पहल: ग्लोबल हॉपर ब्रांड के तहत दिल्ली–कटरा लग्ज़री बस सेवा शुरू

ग्लोबल न्यूज इंडिया .कुलविंदर सिंह 05/01/2026

दिल्ली से जम्मू-कश्मीर के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र कटरा के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। धीर लॉजिस्ट ने अपने नए और प्रीमियम ब्रांड ग्लोबल हॉपर के तहत दिल्ली–कटरा और कटरा–दिल्ली रूट पर एक आधुनिक लग्ज़री बस सेवा शुरू करने की घोषणा की है। यह सेवा उन यात्रियों के लिए शुरू की गई है जो आरामदायक और सुरक्षित सफर चाहते हैं, लेकिन महंगी बिज़नेस क्लास बसों का ज्यादा किराया नहीं देना चाहते।
ग्लोबल हॉपर की यह नई लग्ज़री बस सेवा आम बसों से एक कदम आगे है और वहीं दूसरी ओर मौजूदा बिज़नेस क्लास बसों की तुलना में इसका किराया थोड़ा कम रखा गया है। कंपनी का उद्देश्य है कि ज़्यादा से ज़्यादा यात्री कम खर्च में बेहतर और भरोसेमंद यात्रा का अनुभव ले सकें।
इस लग्ज़री बस में यात्रियों के लिए आरामदायक पुश-बैक सीटें, पर्याप्त लेगरूम, एसी सुविधा और शांत वातावरण उपलब्ध कराया गया है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा भी थकान रहित हो सके। बस का इंटीरियर आधुनिक डिजाइन में तैयार किया गया है ताकि यात्रियों को सफर के दौरान प्रीमियम अनुभव मिले। बेहतर सस्पेंशन सिस्टम के कारण पहाड़ी और घुमावदार रास्तों पर भी यात्रा स्मूद और सुरक्षित रहेगी।
दिल्ली–कटरा रूट खास तौर पर माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस रूट पर सफर करते हैं। धीर लॉजिस्ट की यह नई सेवा श्रद्धालुओं के साथ-साथ टूरिस्ट, फैमिली ट्रैवलर्स और नियमित यात्रियों के लिए भी एक बेहतर विकल्प साबित होगी। कम किराए में लग्ज़री सुविधाएं मिलने से यात्रियों को अब सड़क मार्ग से यात्रा करना और भी सुविधाजनक लगेगा।
कंपनी की ओर से बताया गया है कि ग्लोबल हॉपर बसों का संचालन अनुभवी और प्रशिक्षित ड्राइवरों द्वारा किया जाएगा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी बसों की नियमित जांच और समय-समय पर मेंटेनेंस की जाएगी। समय पर प्रस्थान और समय पर पहुंचना इस सेवा की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
बस का टाइम टेबल यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि दिन और रात दोनों समय यात्रा करने वालों को आसानी हो। टिकट बुकिंग प्रक्रिया को भी सरल रखा गया है, जिससे यात्री बिना किसी परेशानी के अपनी सीट पहले से आरक्षित कर सकें।
ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि दिल्ली–कटरा रूट पर इस तरह की किफायती लग्ज़री बस सेवा शुरू होना एक सकारात्मक कदम है। इससे यात्रियों को बेहतर विकल्प मिलेंगे और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।
कुल मिलाकर, धीर लॉजिस्ट द्वारा ग्लोबल हॉपर ब्रांड के तहत शुरू की गई दिल्ली–कटरा लग्ज़री बस सेवा आराम, सुरक्षा और किफायत का बेहतरीन मेल है, जो आने वाले समय में यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय होने की पूरी संभावना रखती है।

निजी बसों पर सख्ती: तीन दिन में कैरियर-सीढ़ी हटाने के आदेश, 1 जनवरी से कटेंगे चालान

राजस्थान में निजी बस संचालकों के लिए अहम खबर सामने आई है। परिवहन विभाग ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निजी बसों की छतों पर लगे कैरियर और चढ़ने की सीढ़ियों को हटाने के सख्त आदेश जारी किए हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि अगर तय समय में नियमों की पालना नहीं हुई, तो 1 जनवरी से विशेष जांच अभियान चलाकर चालान काटे जाएंगे और जरूरत पड़ने पर बसों को सीज भी किया जाएगा।
पूरी रिपोर्ट
परिवहन विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार निजी बसों की छतों पर कैरियर लगाने और छत पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां रखने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद लंबे समय से कई निजी बसों में खुलेआम इन नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था। अब विभाग ने इस पर सख्त रुख अपनाया है।
विभाग ने सभी बस ऑपरेटरों, बस मालिकों और चालकों को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। इस अवधि में बसों की छतों से कैरियर और चढ़ने की सीढ़ियां पूरी तरह हटानी होंगी। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था यात्रियों की जान के लिए खतरा बन रही थी, खासकर लंबी दूरी की यात्रा में।

दरअसल, मोटर वाहन अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के तहत बसों की छत पर यात्रियों या सामान को इस तरह ले जाना प्रतिबंधित है। रोडवेज बसों में यह नियम पहले से लागू है, लेकिन निजी बसों में इसकी अनदेखी की जा रही थी। कई मामलों में बसों की छत पर सामान लादा जाता था और यात्री भी ऊपर चढ़ते नजर आते थे, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
ताजा अपडेट
परिवहन विभाग ने साफ किया है कि 1 जनवरी से विशेष जांच अभियान शुरू किया जाएगा। जो बसें नियमों का पालन नहीं करती पाई गईं, उनके खिलाफ मौके पर चालान काटा जाएगा। गंभीर मामलों में बसों को सीज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि यह कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है।

निजी बस संचालकों के लिए यह चेतावनी आखिरी मौका मानी जा रही है। अगर तय समय में कैरियर और सीढ़ियां नहीं हटाई गईं, तो आर्थिक नुकसान के साथ-साथ बसों का संचालन भी प्रभावित हो सकता है। परिवहन विभाग का साफ संदेश है — नियमों का पालन करें, यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें, तभी सड़कें सुरक्षित बनेंगी।

जालंधर में भीषण धुंध ने ली चालक की जान, अधूरे पुल का गड्ढा बना मौत का फंदा

19/12/2025 कुलविंदर सिंह

जालंधर: घने कोहरे ने एक बार फिर जानलेवा हादसा करवा दिया। आदमपुर के पास एक अधूरे पुल के गहरे गड्ढे में कार गिरने से चालक की मौत हो गई। यह हादसा  सुबह की बात है।

क्या हुआ था?
होशियारपुर से जालंधर आ रहा चालक घने कोहरे की वजह से सही रास्ता नहीं देख पाया। आदमपुर के पास खुर्दपुर इलाके में बने अधूरे पुल का रास्ता बंद नहीं था। कार सीधे उसी पुल के गड्ढे में जा गिरी। गड्ढा काफी गहरा था।

रेस्क्यू ऑपरेशन चला
हादसे की खबर मिलते ही पुलिस  की टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने कार को गड्ढे से निकाला। कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त मिली। चालक को बाहर निकाला गया तो वह पहले ही दम तोड़ चुका था।

स्थानीय लोगों का गुस्सा
स्थानीय लोग इस हादसेसे आहत हैं। उनका कहना है कि इस अधूरे पुल का काम लंबे समय से रुका है। ऐसे खतरनाक स्थान पर कोई चेतावनी या बैरिकेडिंग नहीं थी। धुंध के दिनों में यह और भी खतरनाक हो जाता है। लोग प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।

पुलिस क्या कहती है?
पुलिस ने मृतक की पहचान की है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। उनका कहना है कि हादसे की वजह घना कोहरा और अधूरे पुल के पास सुरक्षा इंतजाम न होना है। मामले की जांच जारी है।

सावधानी जरूरी
इस हादसे के बाद ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि घने कोहरे में गाड़ी चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। खासकर ऐसे रास्तों पर जहां निर्माण कार्य चल रहा हो, वहां स्पीड कम रखें और हेडलाइट का इस्तेमाल करें।

इस तरह के हादसे सिर्फ एक चालक की जान नहीं लेते, बल्कि एक पूरे परिवार को तबाह कर देते हैं। प्रशासन को ऐसे खतरनाक स्थानों पर तुरंत सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए।

घने कोहरे ने ली 13 जानें, यमुना एक्सप्रेसवे बना मौत का रास्ता

Global News India

कुलविंदर सिंह
उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे पर गुरुवार तड़के हुआ सड़क हादसा देश के लिए एक बड़ा अलर्ट बनकर सामने आया है। घने कोहरे के कारण दृश्यता लगभग शून्य हो गई थी, जिसके चलते 19 वाहन आपस में टकरा गए। इस दर्दनाक दुर्घटना में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए।

डिटेल रिपोर्ट

हादसा सुबह करीब 4 बजे मथुरा के पास यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ। बताया जा रहा है कि पहले एक बस ने अचानक ब्रेक लगाया, जिसके बाद पीछे से आ रहे वाहन एक-दूसरे से टकराते चले गए। हादसे में कई बसें, कारें और अन्य वाहन शामिल थे।
टक्कर इतनी तेज थी कि कुछ वाहनों में आग लग गई। कई यात्री अंदर ही फंस गए। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि कोहरा इतना घना था कि कुछ मीटर आगे भी दिखाई नहीं दे रहा था।

पुलिस और प्रशासन का बयान

पुलिस के अनुसार, 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। राहत और बचाव कार्य में दमकल विभाग और एंबुलेंस टीमों को लगाया गया।

बैकग्राउंड

हर साल सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत में कोहरे के कारण सड़क हादसे बढ़ जाते हैं। यमुना एक्सप्रेसवे जैसे तेज रफ्तार मार्ग पर कोहरा और लापरवाही जानलेवा साबित होती है। इससे पहले भी यहां कई बड़े हादसे हो चुके हैं।

करंट अपडेट

हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए यातायात बंद किया गया। बाद में क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर रास्ता साफ किया गया। प्रशासन ने कोहरे के दौरान धीमी गति से वाहन चलाने की अपील की है।

निष्कर्ष

यह हादसा ड्राइवरों के लिए एक कड़ा संदेश है कि कोहरे में तेज रफ्तार जानलेवा हो सकती है। सावधानी और नियमों का पालन ही ऐसे हादसों को रोक सकता है।

जालंधर में पुलिसकर्मी ने फांसी लगाकर दी जान, कमरे से मिला सुसाइड नोट

पंजाब के जालंधर में शुक्रवार सुबह एक पुलिसकर्मी के फांसी लगाकर आत्महत्या करने का मामला सामने आया। कमरे से सुसाइड नोट मिलने के बाद घटना गंभीर हो गई है। मृतक की पहचान रंजीत सिंह के रूप में हुई है, जो पंजाब पुलिस की कमांडो बटालियन में तैनात था।


रिपोर्ट

घटना जालंधर के एक निजी कमरे की है, जहां रंजीत सिंह शुक्रवार सुबह फंदे से लटका मिला। पुलिस के अनुसार, जब रंजीत ड्यूटी के लिए नहीं पहुंचा तो साथी जवान उसे देखने आए। कमरे का दरवाजा खोलने पर वह बेहोशी की हालत में फंदे से लटका मिला।

जांच के दौरान कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसकी असलियत की पुष्टि के लिए फॉरेंसिक जांच जारी है। परिजनों ने बताया कि रंजीत पिछले कुछ दिनों से तनाव में था, लेकिन परिवार को इसकी कोई स्पष्ट वजह नहीं पता।

मृतक मूल रूप से पटियाला में तैनात था और कुछ समय से जालंधर में ड्यूटी पर था। पुलिस ने मौके से सभी सबूत जुटा लिए हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

पंजाब में पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों द्वारा आत्महत्या की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव, लंबे शेड्यूल और निजी परेशानियां अक्सर ऐसी घटनाओं की वजह बनती हैं। पंजाब पुलिस विभाग भी समय-समय पर अपने कर्मचारियों के लिए काउंसलिंग और तनाव प्रबंधन कार्यक्रम चलाता रहा है।

पुलिस ने धारा 174 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। सुसाइड नोट की जांच फॉरेंसिक टीम कर रही है। परिवार ने रंजीत की मौत के पीछे किसी दबाव या मानसिक तनाव की आशंका जताई है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सुसाइड नोट की जांच के बाद ही स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

घटना ने एक बार फिर पुलिसकर्मियों में मानसिक स्वास्थ्य के सवाल को उजागर कर दिया है। जांच पूरी होने के बाद पुलिस विभाग इस मामले पर आधिकारिक रिपोर्ट जारी करेगा। वहीं, परिवार न्यायपूर्ण जांच और रंजीत की मौत की असल वजह सामने लाने की मांग कर रहा है।

पद बेचने” के आरोपों पर सियासी युद्ध, सिद्धू के खुलासे से सियासत गरमाई

पंजाब कीराजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों ने तूफान ला दिया है। कांग्रेस से सस्पेंड की गईं पूर्व सांसद नवजोत कौर सिद्धू ने पार्टी पर जमकर हमला बोला और कथित तौर पर मुख्यमंत्री पद की सौदेबाजी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों ने न सिर्फ कांग्रेस के लिए बड़ा संकट खड़ा कर दिया है, बल्कि विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को भी पिछली सरकारों पर निशाना साधने का मौका दे दिया है।

रिपोर्ट
हालियाघटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब नवजोत कौर सिद्धू को कांग्रेस से सस्पेंड कर दिया गया। इसके जवाब में सिद्धू ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर निशाना साधते हुए कहा कि वह “किसी भ्रष्ट अध्यक्ष” के साथ काम नहीं कर सकतीं। उन्होंने पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चलने वाली कथित सौदेबाजी का भी जिक्र किया।

इस मौके का फायदा उठाते हुए आम आदमी पार्टी ने हमला बोल दिया। पंजाब के वित्त मंत्री और आप नेता हरपाल सिंह चीमा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस और भाजपा हाईकमान को इन आरोपों पर 24 घंटे के भीतर जवाब देने की चुनौती दी।

चीमा ने सिद्धू और पूर्व कांग्रेसी नेता (अब भाजपा में) सुनील जाखड़ के पुराने बयानों को दोहराते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सिद्धू ने कप्तान अमरिंदर सिंह पर 500 करोड़ रुपये देकर मुख्यमंत्री पद हासिल करने का आरोप लगाया था, वहीं जाखड़ ने चरणजीत सिंह चन्नी पर 350 करोड़ रुपये का ऐसा ही आरोप लगाया था। चीमा ने सवाल उठाया कि जब ये नेता कांग्रेस में थे तब चुप क्यों थे और पार्टी बदलने के बाद ही बोल रहे हैं।


यह विवाद अचानक नहीं,बल्कि पंजाब की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और भ्रष्टाचार के आरोपों की पृष्ठभूमि में उपजा है। आप नेता हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया है कि 1997 से 2022 तक राज्य पर शासन करने वाली पार्टियों (कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल-भाजपा) के चरित्र और आचरण को अब उनके ही पूर्व सदस्य उजागर कर रहे हैं। आप सरकार लगातार यह दावा करती आई है कि पिछली सरकारों के कारण पंजाब रेत, शराब, ट्रांसपोर्ट माफिया और नशे के कारोबार जैसी समस्याओं से जूझ रहा था।

इस घटनाक्रम केबाद पंजाब की सियासत में निम्नलिखित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:

· आप सरकार का रुख: वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आरोपों को पिछली सरकारों की “लूट की प्रणालीगत व्यवस्था” बताया। उन्होंने दावा किया कि आप सरकार के आने से ही इस भ्रष्टाचार का असली चेहरा उजागर हुआ और राज्य में अब ज़मीन व ट्रांसपोर्ट घोटाले नहीं हैं।
· विपक्षी प्रतिक्रियाएं: भाजपा ने भी आप सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के महामंत्री राकेश राठौर ने आरोप लगाया कि पंजाब में कानून-व्यवस्था का पतन हो रहा है, वित्तीय हालात बिगड़े हैं और नशे की समस्या गंभीर बनी हुई है।
· कांग्रेस का स्टैंड: नवजोत कौर सिद्धू के बयानों के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, आप के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।

नवजोत कौर सिद्धूके आरोपों ने पंजाब राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह मामला सिर्फ एक नेता के सस्पेंशन से आगे बढ़कर पिछली सरकारों के कार्यकाल पर सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस इन गंभीर आरोपों पर क्या जवाब देती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, आप सरकार पिछली सरकारों पर लगातार हमला करके और विकास के अपने मॉडल को आगे रखकर इन आरोपों को राजनीतिक तौर पर कितना भुनाती है, यह भी राज्य की राजनीति का अगला अध्याय तय करेगा।

पुरानी रंजिश ने ली जान, 12 दिन संघर्ष के बाद युवक की मौत

ग्लोबल न्यूज़ इंडिया कुलविंदर सिंह

एक पुरानीरंजिश ने एक युवक की जान ले ली। पटारा पुलिस जालंधर थाना क्षेत्र में हुए एक सशक्त हमले में गंभीर रूप से घायल हुए युवक ने आज, 10 दिसंबर 2025 को, 12 दिन तक जिंदगी से लड़ने के बाद अंतिम सांस ली। इस घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि मुख्य आरोपी अभी भी फरार है।

डिटेल रिपोर्ट:
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, हमला 28 नवंबर की शाम पटारा थाना क्षेत्र के एक गांव में हुआ। पीड़ित युवक पर अचानक कई लोगों ने लाठी-डंडों और तेज धार वाले हथियारों से हमला बोल दिया। गंभीर हालत में उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आज दोपहर उसकी मौत हो गई। शुरुआत में पुलिस ने गंभीर चोट पहुंचाने का मामला दर्ज किया था, लेकिन मौत के बाद अब इसमें हत्या के आरोप जोड़ दिए गए हैं। पुलिस ने अब तक घटना में शामिल चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है।


प्रारंभिक जांच सेपता चला है कि यह हमला एक पुरानी दुश्मनी का नतीजा है। यह दुश्मनी पीड़ित युवक की मौसी के बेटे और आरोपियों के बीच चल रही थी, जिसकी आग में पीड़ित युवक झुलस गया। इससे पहले भी दोनों पक्षों के बीच विवाद की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं, लेकिन पुलिस मध्यस्थता के बाद मामला शांत हो गया था।

पीड़ित केशव का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद पुलिस ने परिजनों को सौंप दिया है। गिरफ्तार चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए विशेष दस्ते का गठन किया गया है और कई ठिकानों पर छापेमारी जारी है। परिवार ने न्याय की मांग करते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

इस घटनाने एक बार फिर सामुदायिक विवादों में बढ़ती हिंसा और पुलिस की निवारक भूमिका पर चिंता के सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें पुलिस की उस कार्रवाई पर टिकी हैं, जिसमें शीघ्र मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए। यह मामला आने वाले दिनों में और सुर्खियां बटोर सकता है।

देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर भीषण टक्कर, गन्ने से लदा ट्रोला बस में घुसा

ग्लोबल न्यूज़ इंडिया कुलविंदर सिंह

देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर सोमवार सुबह बड़ा हादसा हो गया, जब यात्रियों से भरी एक प्राइवेट  बस गन्ने से भरे ट्रोले से जोरदार टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। हादसा सुबह के समय यात्री रश के दौरान हुआ, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

डिटेल रिपोर्ट

हादसा सुबह करीब 6:30 बजे मंगलौर के पास हुआ। बस देहरादून से हरिद्वार की ओर जा रही थी, वहीं गन्ने से भरा ट्रोला आगे धीमी रफ्तार में चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बस चालक को ट्रोला अचानक बहुत नजदीक दिखा और ब्रेक लगाने से पहले ही टक्कर हो गई।

टक्कर इतनी तेज थी कि गन्ने की लंबी-लंबी फसल बस के अंदर तक घुस गई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। बस चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई यात्रियों को हॉस्पिटल भेजा गया। पुलिस ने बताया कि अधिकांश घायल खतरे से बाहर हैं।

हादसे के कारण हाईवे पर लंबा जाम लग गया जिसे बाद में क्रेन और पुलिस टीम ने मिलकर खुलवाया।

बैकग्राउंड

इस हाईवे पर भारी वाहनों और तेज रफ्तार बसों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। पिछले कुछ महीनों में इसी रूट पर कई दुर्घटनाएँ दर्ज की गई हैं। सड़क किनारे रोशनी की कमी और ट्रोलों की धीमी गति भी कई बार दुर्घटनाओं की वजह बनती है।
इसी के साथ, आप द्वारा उल्लेखित विषय के अनुसार, पंजाब में पिछले तीन सालों में भी गंभीर अपराधों की संख्या बढ़ी है और कई मामलों में पुलिस पर कार्रवाई में देरी के आरोप लगे हैं, जिससे सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े होते रहे हैं।

करंट अपडेट

पुलिस ने ट्रोला चालक को हिरासत में लिया है और दुर्घटना की वजहों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ओवरस्पीड और आगे वाले वाहन की दूरी का गलत अनुमान मुख्य कारण माना जा रहा है। बस का मलबा हटाकर यातायात पूरी तरह बहाल कर दिया गया है।

निष्कर्ष

हादसे ने एक बार फिर हाईवे सुरक्षा और भारी वाहनों की मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने कहा है कि आने वाले दिनों में इस रूट पर विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। यात्रियों की सुरक्षा के लिए बस ऑपरेटरों को भी रफ्तार नियंत्रण और ड्राइवर प्रशिक्षण के निर्देश दिए जा सकते हैं।