ग्लोबल न्यूज़ इंडिया.कुलविंदर सिंह
इंदौर, 17 जनवरी 2026: मध्यप्रदेश के परिवहन विभाग ने राज्य में चलने वाली स्लीपर बसों को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। विभाग ने सभी बस ऑपरेटर्स को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया है कि आने वाले तीन दिनों के अंदर सभी स्लीपर बसों की AIS (ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड) जांच पूरी कराई जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित वाहन और ऑपरेटर को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और बस संचालन पर रोक लग सकती है।
इस कार्रवाई का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा और स्लीपर बसों के तकनीकी मानकों को सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में राज्य में कई स्लीपर बस हादसे सामने आए, जिनमें जान-माल का नुकसान हुआ। इसके बाद से ही विभाग और सरकार ने बसों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि AIS टेस्टिंग जरूरी इसलिए है ताकि:
बस की बॉडी और स्ट्रक्चर सुरक्षित रहे
आपातकालीन स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा सके
आग से सुरक्षा और इलेक्ट्रिकल सिस्टम सही पाया जाए
सीट, बर्थ, खिड़की और इंटीरियर मानकों पर हो
जानकारी के मुताबिक, बुधवार देर रात से ही विशेष चेकिंग अभियान की शुरुआत कर दी गई। विभाग ने कई स्लीपर बसों को रोका और उनकी जांच की। जो बसें दस्तावेज़ और फिटनेस में कमियां लिए थी, उन पर मौके पर चालान भी किया गया। अधिकारियों ने साफ कहा कि यह अभियान आने वाले दिनों में और सख्त होगा।
खबर है कि पिछले महीने ही लगभग 90% स्लीपर बसों में आग सुरक्षा और इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ियां पाई गई थीं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही विभाग ने दूसरा चरण शुरू किया है, जिसमें अब रजिस्ट्रेशन और संचालन से संबंधित कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं।
परिवहन विभाग ने बस ऑपरेटर्स को बैठक के लिए भी बुलाया है, ताकि नियमों को स्पष्ट किया जा सके। अधिकारी चाहते हैं कि ऑपरेटर्स खुद आगे आकर सुरक्षा मानकों का पालन करें, क्योंकि स्लीपर बस उद्योग से लाखों यात्रियों की सुरक्षा जुड़ी है। यदि सभी वाहन AIS मान्यता पा लेते हैं, तो यात्रियों का भरोसा भी बढ़ेगा और उद्योग सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ सकेगा।
बस ऑपरेटर्स की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। कई ऑपरेटरों ने कहा कि वे विभाग के निर्देश का सम्मान करते हैं और जल्द से जल्द जांच प्रक्रिया पूरी कराएंगे, हालांकि कुछ ऑपरेटरों ने समयसीमा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि AIS टेस्टिंग में लाइन और औपचारिकताएँ होती हैं, इसलिए 3 दिन की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए।
फिलहाल विभाग इस मामले में सख्त है और समय बढ़ाने का संकेत नहीं दिया है। आने वाले दिनों में यह देखने वाली बात होगी कि कितनी बसें मानकों पर खरी उतरती हैं और कितनी पर विभाग कार्रवाई करता है।



