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तीन साल में आंकड़ों और आरोपों के बीच फंसी पंजाब सरकार, बाढ़ से सड़क हादसों तक विफलताओं का दौर

चंडीगढ़। पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार को तीन साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इस मौके पर सरकार के खिलाफ आंकड़े और आरोपों का सिलसिला गहरा गया है। साल 2023 में राज्य में सड़क हादसों में 4,829 लोगों की जान गई, जो पिछले कुछ वर्षों में सबसे ज्यादा है। वहीं, पिछले साल आई “सत्तर साल की सबसे भीषण” बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठे। विपक्षी दल लगातार सरकार पर अर्थव्यवस्था, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे मोर्चों पर पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगा रहे हैं।

विस्तृत रिपोर्ट: आंकड़े बोलते हैं, विपक्ष लगाता है आरोप

राज्य के प्रशासनिक कामकाज को लेकर चिंता जताने वाले सिर्फ विपक्षी नेता ही नहीं हैं, बल्कि आधिकारिक आंकड़े भी गंभीर चिंता का सब्ज़क पेश करते हैं।

· सड़क सुरक्षा पर डरावने आंकड़े: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में सड़क हादसों में मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है। 2023 में हुए कुल सड़क हादसों में 78.2% लोगों की मौत हो गई। इसकी तुलना में, राष्ट्रीय औसत केवल 28% है। यह आंकड़ा राज्य में सड़क सुरक्षा उपायों की गंभीर कमी को दर्शाता है।
  · खतरनाक समय: आंकड़े बताते हैं कि शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। 2023 में इस दौरान 1,212 हादसों में 932 लोगों की जान गई।
  · हादसों और मौतों में लगातार वृद्धि: 2020 के बाद से हादसों और मौतों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2020 में 5,203 हादसों में 3,898 मौतें हुई थीं, जो 2023 में बढ़कर 6,269 हादसों और 4,829 मौतों तक पहुंच गईं।
· बाढ़ प्रबंधन पर घेराव: 2025 में आई भीषण बाढ़ के दौरान सरकार की भूमिका पर सवाल उठे। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वरिंग ने बाढ़ को “मानव निर्मित आपदा” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने पहले तो बचाव के उपाय नहीं किए और फिर पीड़ितों को राहत और पुनर्वास भी नहीं दिया। बीजेपी ने भी सरकार के खिलाफ एक तरह से “चार्जशीट” जारी करते हुए तैयारियों और जवाबदेही में “एतिहासिक विफलता” का आरोप लगाया।
· राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप: विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर दिल्ली से नियंत्रण किया जा रहा है। कांग्रेस के बोलाथ विधायक सुखपाल खैरा ने कहा कि पंजाब उसके चुने हुए मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि दिल्ली से अरविंद केजरीवाल चला रहे हैं। बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने अपवित्रता (सैक्रिलेज) के मुद्दे पर भी सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।

पृष्ठभूमि: पुराने आंकड़े और बढ़ती समस्या

पंजाब में सड़क हादसों की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन पिछले तीन साल में यह और विकराल हुई है। एनसीआरबी के 2022 के आंकड़े भी यही बताते थे कि पंजाब में सड़क हादसों में घायलों की तुलना में मृतकों की संख्या अधिक है, जो देश के अधिकतर राज्यों के ट्रेंड के उलट है। इससे साफ है कि हादसों की गंभीरता अधिक है या फिर घायलों को समय पर इलाज मिलने में दिक्कत आ रही है।

बाढ़ प्रबंधन को लेकर भी आलोचना का सिलसिला नया नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों और नालों की सफाई न होना, बांधों से पानी का अचानक और देर से छोड़ा जाना जैसे कारणों ने हालात को बदतर बनाया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के पास मानसून की तैयारी के लिए मात्र 17 दिन का समय था, जिसमें 2,800 किलोमीटर लंबे डूसी बंधों की मरम्मत और नालों की सफाई का काम शामिल था।

ताज़ा अपडेट: सरकार के दावे और विपक्ष का हमला

इन आरोपों के बीच, सरकार ने कुछ कदम उठाने का दावा किया है। सरकार ने सड़क हादसों में घायलों को समय पर इलाज मुहैया कराने के लिए एक ‘सड़क सुरक्षा फोर्स’ बनाई है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि उसने अब तक 35,000 से ज्यादा लोगों की जान बचाई है।

हालांकि, विपक्ष इन दावों से संतुष्ट नज़र नहीं आता। कांग्रेस और बीजेपी लगातार सरकार पर जनता से किए वादे पूरे न करने और राज्य के संसाधनों का दुरुपयोग करने का आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजा वरिंग ने तो यहां तक कहा है कि AAP की सरकार अपना कार्यकाल पूरा भी कर पाएगी या नहीं, यह निश्चित नहीं है।

निष्कर्ष: चुनौतियां बनी हुई हैं, भविष्य की राह मुश्किल

स्पष्ट है कि पंजाब सरकार के सामने सड़क सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और विपक्ष के तीखे हमले की तीनहरी चुनौती है। आधिकारिक आंकड़े राज्य की सड़कों को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में सरकार की तैयारी और रणनीति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

सरकार अपनी उपलब्धियां गिना सकती है, लेकिन विपक्ष के पास आंकड़ों और जमीनी हकीकत के आधार पर हमला करने के लिए पर्याप्त हथियार मौजूद हैं। अगले दो साल सरकार के लिए इस धारणा को बदलने का मौका होंगे कि पिछले तीन साल “अराजकता और टूटे वादों” के थे। जनता का विश्वास जीतने के लिए सरकार को न सिर्फ आंकड़ों में सुधार करना होगा, बल्कि जमीन पर ठोस और दिखाई देने वाले बदलाव भी लाने होंगे।

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