Home देश - विदेश पहिले-पहिले हम कइनी, छठी मइया व्रत तोहार… गीतों की गूंज के बीच छठव्रतियों ने नहाय-खाय के साथ शुरू किया छठ महापर्व

पहिले-पहिले हम कइनी, छठी मइया व्रत तोहार… गीतों की गूंज के बीच छठव्रतियों ने नहाय-खाय के साथ शुरू किया छठ महापर्व

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Global News India पटना: आस्था के पर्व छठ की शुरुआत मंगलवार से पूरे बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में नहाय-खाय के साथ हो गई। सुबह से ही गली-मोहल्लों में महिलाएं घी, चूड़ा, गुड़ और अरवा चावल से विशेष भोजन तैयार करने में जुटी थीं। ढोलक और मंजीरे की थाप पर गूंजते पारंपरिक गीत—“पहिले-पहिले हम कइनी, छठी मइया व्रत तोहार…”—से वातावरण भक्ति से भर उठा।इस पावन अवसर पर गंगा घाटों, तालाबों और घरों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया। महिलाओं ने स्नान कर व्रत की शुरुआत की और सूर्य देव व छठी मइया से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। घरों में प्रसाद के रूप में लौकी-भात, कद्दू-भात और चने की दाल का सेवन किया गया। इसे शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।राजधानी पटना से लेकर छोटे कस्बों तक भक्तों की आस्था का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। लोग अपने परिवारों के साथ तैयारी में जुटे रहे। दुकानों में नारियल, केला, ईख और ठेकुआ बनाने की सामग्री की भारी खरीदारी हुई। सड़क किनारे अस्थायी बाजारों में छठ पूजा से जुड़ी वस्तुओं की खरीददारी करते लोगों की भीड़ दिखी।छठ पूजा का दूसरा चरण खरना बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखकर शाम को गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। उसके बाद तीसरे और चौथे दिन अस्ताचलगामी और उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम प्रशासन की ओर से किए गए हैं। सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों ने भी स्वच्छता अभियान चलाकर नदी किनारे वातावरण को साफ-सुथरा बनाने का प्रयास किया है।छठ महापर्व प्रकृति, सूर्य और जल की आराधना का प्रतीक है। यह पर्व चार दिनों तक चलता है और इसे सबसे शुद्ध व्रतों में गिना जाता है। इसमें व्रती कठोर नियमों का पालन करते हैं और पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह पर्व पर्यावरण संरक्षण और मानव शरीर के संतुलन से जुड़ा माना जाता है।हर वर्ष की तरह इस बार भी सोशल मीडिया पर भक्तों की आस्था देखने को मिली। फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लोगों ने छठ पूजा की तैयारियों और गीतों के वीडियो साझा किए। खासकर गांवों में पारंपरिक ढोलक की थाप और लोकगीतों ने माहौल को जीवंत बना दिया।पटना, भागलपुर, गया, दरभंगा, वाराणसी और रांची जैसे शहरों में प्रशासन ने घाटों पर लाइटिंग, टेंट और सुरक्षा के इंतज़ाम किए हैं। जहां पहले भीड़ के कारण अव्यवस्था होती थी, वहां इस बार ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है।इस बार के छठ में लोगों की भावना विशेष रही – महामारी और कठिन दौर के बाद लोग फिर से पूरे उत्साह से इस महापर्व में शामिल हुए। सूर्य उपासना और छठी मइया की आराधना के साथ समाज में एकता, स्वच्छता और सकारात्मकता का संदेश फैलता दिखा।

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