ग्लोबल न्यूज़ इंडिया कुलविंदर सिंह
चंडीगढ़। पंजाब में निजी हथियार रखने के लाइसेंस धारकों के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। प्रदेश सरकार सभी मौजूदा हथियार लाइसेंस धारकों की फिर से पुलिस जांच (वेरिफिकेशन) कराने पर विचार कर रही है। इस कदम का मकसद ‘गैर-जरूरी’ माने जाने वाले लाइसेंस रद्द करना और कानून-व्यवस्था की स्थिति को मजबूत बनाना बताया जा रहा है।
विस्तृत रिपोर्ट
सूत्रोंसे मिली जानकारी के मुताबिक, पंजाब सरकार और पुलिस प्रमुखों के बीच हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर मंथन हुआ। अधिकारियों का मानना है कि पिछले कई सालों में बड़ी संख्या में जारी किए गए लाइसेंस की वास्तविक जरूरत और सुरक्षा पहलुओं पर फिर से गौर करना आवश्यक है। इस प्रक्रिया के तहत, हर लाइसेंस धारक को यह साबित करना होगा कि उसे व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए हथियार रखने की सचमुच में कितनी आवश्यकता है।
पुलिस विभाग की यह मान्यता है कि कई लाइसेंस सामाजिक हैसियत दिखाने या फिर अनावश्यक डर के चलते हासिल किए गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “हमारा फोकस सिर्फ उन्हीं नागरिकों को लाइसेंस देना है, जिनकी जान या संपत्ति को वास्तविक और गंभीर खतरा हो। बिना ठोस कारण के हथियार रखने की अनुमति देना सही नहीं है।”
पृष्ठभूमि
पंजाब मेंहथियार लाइसेंस जारी करने को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अतीत में कई मामले सामने आए हैं, जहां लाइसेंस धारकों द्वारा ही हथियारों का दुरुपयोग किया गया या फिर उन हथियारों का इस्तेमाल अपराध में हुआ। इन घटनाओं के बाद लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को और सख्त बनाने की मांग उठती रही है। वर्तमान प्रशासन का यह कदम पिछली कमियों को दूर करने और एक पारदर्शी, जरूरत-आधारित प्रणाली लाने के प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।
ताजा अपडेट
फिलहाल यह प्रस्ताव चर्चाके चरण में है। गृह विभाग ने इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट और कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह नियम अगर लागू होता है, तो सभी लाइसेंस धारकों को एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने जिले के पुलिस अधिकारियों के समक्ष आवेदन करके वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस दौरान धारक की पृष्ठभूमि, आपराधिक रिकॉर्ड (अगर कोई हो), और खतरे के दावों की फिर से छानबीन की जाएगी। जिनके लाइसेंस रद्द होंगे, उन्हें अपना हथियार जमा करना होगा।
निष्कर्ष
इस संभावित नए नियम काहथियार लाइसेंस धारकों के एक बड़े वर्ग पर सीधा असर पड़ेगा। अगर यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है, तो पंजाब देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां सभी पुराने लाइसेंसों का बड़े पैमाने पर पुनर्विलोकन किया गया है। इस कार्रवाई से न केवल गैर-जरूरी हथियारों की संख्या कम होने की उम्मीद है, बल्कि अवैध हथियारों की तस्करी और अपराधों पर भी अंकुश लग सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से अंजाम देना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती होगी। अगले कुछ हफ्तों में गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों से यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह योजना कब और कैसे लागू होती है।



