ग्लोबल न्यूज़ इंडिया कुलविंदर सिंह वरिष्ठ पत्रकार
चंडीगढ़। पंजाब पुलिस की छवि एक बार फिर धूमिल हुई है। भ्रष्टाचार के आरोप में डीआईजी जैसे वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी और खुद पुलिसकर्मियों द्वारा कारोबारियों के सीधे अपहरण जैसी बड़ी घटनाओं ने विभाग की जवाबदेही और सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले तीन वर्षों में विभिन्न स्तर के पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज मामले जनता के विश्वास को कमजोर कर रहे हैं।
वरिष्ठ अधिकारी से लेकर जूनियर स्टाफ तक, भ्रष्टाचार के मामलों की लिस्ट लंबी
हाल में केंद्रीय जांच ब्यूरा (सीबीआई) ने डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) हरचरण सिंह भुल्लर को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। उन पर मंडी गोबिंदगढ़ के एक स्क्रैप डीलर से 2023 में दर्ज एफआईआर को ‘सैटल’ कराने के बदले आठ लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद हुई तलाशी में उनके यहां से 7.36 करोड़ रुपये से अधिक नकदी और कीमती गहने बरामद हुए। इस मामले में उनकी न्यायिक हिरासत भी बढ़ा दी गई है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी उन्हें तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया है।
डीआईजी भुल्लर का मामला अकेला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कई वरिष्ठ और जूनियर अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हैं:
· डीएसपी वविंदर कुमार महाजन: एक बड़े नार्कोटिक्स मामले में आरोपी से 45 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में फरार हैं।
· एसीपी निर्दोष कौर: लुधियाना में एक पारिवारिक विवाद केस को अपने पक्ष में करने के लिए 60,000 रुपये रिश्वत मांगने पर गिरफ्तार।
· पूर्व इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह: हेरोइन तस्करों को सुरक्षा देने के आरोप में गिरफ्तार। उन पर आरोप है कि उन्होंने मादक पदार्थ बरामद करने की घटना दर्ज कराते समय नकदी और सोने का एक हिस्सा अपने पास रख लिया।
पुलिस वाले बने अपहरणकर्ता: नोएडा से उठाकर पंजाब ले गए कारोबारी
भ्रष्टाचार से भी बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पंजाब पुलिस के कर्मचारियों पर ही बड़ा अपराध करने का आरोप है। आरोप है कि पंजाब के खन्ना साइबर क्राइम थाने के एक हेड कॉन्स्टेबल ने स्वयं को एसपी बताया और नोएडा के एक कॉल सेंटर पर छापेमारी का नाटक किया। इस दल ने वहां से तीन कारोबारियों का अपहरण कर उन्हें पंजाब ले जाकर 10 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की। साहनेवाल थाने में पीड़ितों के बयान दर्ज कराते ही यह पोल खुल गई।
विभाग की साख पर लगातार प्रहार का सिलसिला
पंजाब पुलिस के खिलाफ आरोप नए नहीं हैं। 2022 में भी दिल्ली के एक होटल में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पंजाब पुलिस के कर्मियों पर एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ मारपीट और बदसलूकी का मामला दर्ज हुआ था। वहीं, विगिलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, केवल लुधियाना रेंज में ही 2024 में 31 मामलों में 41 लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें कई पुलिसकर्मी शामिल थे।
पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “भ्रष्टाचार का पैमाना समझने के लिए केस दर्ज होने का इंतजार न करें। पुलिस अधिकारियों की जीवनशैली, उनके मकान, गाड़ियां और विदेश यात्राओं पर गौर करें।”
सुधार की कोशिशें और आगे की राह
डीआईजी भुल्लर जैसे वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और विजिलेंस ब्यूरो की ताबड़तोड़ छापेमारी शून्य सहनशीलता की नीति का संकेत देती हैं। माना जा रहा है कि भुल्लर के पास से बरामद एक डायरी में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और राजनेताओं से जुड़े लेन-देन का रिकॉर्ड हो सकता है, जिससे और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
हालांकि, केवल कार्रवाई ही काफी नहीं है। अधिकारियों का एक वर्ग मानता है कि विभाग को अपनी छवि सुधारने के लिए खुद ही एक बड़ा अभियान चलाकर अपने भीतर सफाई करनी चाहिए। जब तक पुलिस की कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं आती और आम जनता का भरोसा नहीं जीता जाता, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।



